एक खुद्दार की कहानी

कहते है ना कि गरीबी इंसान को बहुत बार अपने उसूलों को तोड़ने पर मजबुर कर देती है। पर वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो गरीब तो हैं पर उसूल के बड़े पक्के होते हैं।
आज हमारे देश में एक अच्छा खासा तबका गरीब है।
एक गरीब किसान था जिसका नाम रामू था। उसका रोज का काम था कि सुबह उठ कर नित्य क्रिया करने के बाद अपने बैलों को उनके नांद पर बांध कर फिर बैलों के बांधने के स्थान की साफ सफाई करके फिर वो सुबह का नस्ता करने बैठ जाता था। नाश्ता करने के बाद बीबी रुपा को बोलता था कि तुम मेरा दोपहर का खाना पैक कर दो और फिर वो अपने दोनो बैलों के साथ चल देता था खेतों के लिए। वो दोनो बैलों के साथ ऐसा मस्ती में रोज जाता था जैसे मानो की वो उसके दोस्त हैं। अब बस चले जा रहे है मस्ती में। उसके दोनों बैल भी उसको अपना दोस्त और हम सफर ही समझते थे। दिन भर खेतों में जुताई करने के बाद वो दोपहर बाद अपने घर आता था और बैलों की देखरेख और हिफाजत में लग जाता था। बच्चों को एक प्राथमिक विद्यालय में दाखिला करवाया था जहां उसके बच्चे रोज पढ़ने जाते थे। शाम को जब बच्चे स्कूल से आते थे तो उनके साथ कुछ समय बिता कर फिर वो बैलों को खिलाने लगता था और फिर बाजार करने वाला थैला लेकर चल देता था सब्जियां खरीदने । बाजार से आने के बाद बच्चोंबल स्कूल से मिले हुए होमवर्क को समझा कर फिर अपनी बीबी रूपा से बातें करता था ।
उसकी इतनी आमदनी नहीं थी कि वो परिवार का पालन पोषण एक बहुत अच्छी तरीके से कर सके लेकिन को कुछ भी था सब ठीक ठाक ही था। उसको नहीं किसी चीज के लिए लालच और ना ही कोई ऐसी ख्वाहिश जिसको पूरा ना होने पर वो अपने आप को कोसे। लेकिन फिर भी किसी प्रकार की मायूसी नहीं। एक दिन वह सपरिवार मेला देखने गया। बच्चों को जलेबियां और अन्य मिठाईयां दिलाकर वो कुछ सामान घर के लिए और उसकी बीबी ने बोला कि कुछ रसोईघर के लिए सामान लेना है। वो उसको बोली की एक बर्तन रखने वाला स्टैंड और एक मसाला पीसने वाली और फलों से रस (जूस) निकालने वाली मशीन खरीद दीजिए। उसकी बीबी लज्जाई हुई मुद्रा में बोली हालांकि उसकी बीबी को पता था कि इतने सारे सामान खरीदना उसके पति के लिए मुमकिन नहीं था लेकिन वो कुछ पैसे बचा बचा कर रखी थी। फिर भी पैसे कम पड़ गए । रामू ने दुकानदार से बोला कि भाई साहब एक दो सामान वापस रख लीजिए क्यूंकि मेरे पास इतने पैसे नहीं है मै नहीं दे पाऊंगा। शरमाते हुए उसने दुकान वाले को बोला। इसकी बातों सुनते ही दुकानदार बोला कि अरे भाई कोई बात नहीं तुम सामान ले जाओ जो बाकी पैसे हैं उसको तुम बाद में दे देना। लेकिन को लोग खुद्दार होते हैं उनको किसी की हमदर्दी की जरूरत नहीं पड़ती क्यूंकि वो लोग किसी का एहसान नहीं लेना चाहते हैं। किसान ने दुकान वाले की बात नहीं मानी और खरीदे गए सामान में से कुछ सामान उसको वापस कर दिया और बाकी सामानों को पैक करने के लिए बोल दिया। उसके बाद सभी लोग वापस घर की तरफ चल पड़े। वापस आते समय रास्ते में उसकी पत्नी रुपा ने सोचा कि काश ऊपरवाले ने हमें पैसों से मालामाल किया होता और हमें पैसों की कोई कमी नहीं होती तो आज खरीदा हुआ सामान पैसों की कमी के कारण वापस नहीं करना पड़ता। साथ ही वो ये भी सोच रही थी कि क्या परेशानी थी जब दुकानदार बाकी देने को तैयार था तो इनको क्या परेशानी थी, ये खुद्दार जो ठहरे। ऐसा सोच सोच कर वो आगे बढ़ रही थी। लेकिन वो कर भी क्या सकती थी एक खुद्दार पति की बीवी को ठहरी। एक तरफ सामान के बारे में सोच रही थी तो दूसरी तरफ ये भी सोच रही थी कि वो एक खुद्दार आदमी की बीवी है पाती कि खुद्दारी और उसके उसूलों का पालन करना और उसकी इज्जत करना उसका धर्म भी तो है। यहीं सोच रही थी।
दूसरी तरफ किसान रामू भी कुछ इसी तरह ही सोच रहा था।लेकिन उस कुछ ज्यादा पछतावा नहीं हो रहा था क्यूंकि वो अपनी खुद्दारी के आगे मजबुर था और उसके दूर नहीं जा सकता था। खैर वो सब वापस घर को आए और सबने खाना पीना किया और सो गए। सुबह उठ कर फिर वो रोज की तरह अपने बैलों के साथ काम पर चला गया। शाम को जब वो आया और खाना खाने के समय उसकी बीवी ने मेले वाली बात छेड़ दिया और कहा कि अगर आपने वो सामान ले लिया होता तो क्या जाता हम धीरे धीरे उसका पैसा चुका देते लेकिन आपने लिया ही नहीं माना कर दिया। इस पर रामू गुस्सा हो गया और बोला कि रुपा तुम समझ नहीं रही हो। मै एक खुद्दार आदमी हूं मैंने आज तक किसी का कोई एहसान नहीं लिया नहीं किसी को कोई तकलीफ़ दी। आज वो दुकानदार मुझे बाकी दे देता लेकिन मै जिंदगी भर उसके एहसान के तले दब जाता जो की मुझे पसंद नहीं है। तुम्हे जो चीज चाहिए मै तुम्हारे और बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए और मेहनत करूंगा और तुम लोगों की हर मांग को पूरा करूंगा। इस लिए मुझे मजबुर मत करो मै तुम्हारी जरूरतों को पूरा करूंगा।
एक दिन उसके बच्चों के स्कूल से बुलाहट आई। अगले दिन वो स्कूल पहुंचा और वर्ग शिक्षक से मिला। शिक्षक ने उसके बच्चों के पढ़ाई में बढ़ोतरी के लिए बुलाया था और उसकी विषय पर बातचीत भी हुई। शिक्षक ने कहा कि बच्चों को कुछ अतिरिक्त पढ़ाई की जरूरत है। उनको ट्यूशन करवाइए ताकि उनका बेस और मजबूत हो और वो परीक्षा में अच्छा करें।
अब बात आ गई की अगर अलग से शिक्षक को घर पर बुलाते हैं तो उनको अलग से पैसा कहां से दिया जाएगा। लेकिन रामू ने सोचा कि खैर कोई बात नहीं बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए मै कुछ भी करूंगा कड़ी मेहनत करूंगा और बच्चों को अच्छी से शिक्षा दिलाऊंगा। लेकिन बच्चों के पढ़ाई से कोई समझौता नहीं करूंगा। शिक्षक को बुलाया गया और पढ़ाई शुरू कर दिया गया।
हर महीने शिक्षक कि फीस पहले से बचा कर रख दिया जाता था। एक दिन उसकी बीवी की तबीयत अचानक बिहार गई और उसको अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। चूंकि बीमारी बड़ी थी और ऑपरेशन की नौबत आ गई जिसके लिए काफी पैसों की जरूरत थी। काफी लोगों से बोलने के बाद जब पैसे का बंदोबस्त नहीं हो पाया तो रामू गांव के ही एक ठाकुर साहेब के पास गया और पैसे कि मांग की। कहा की ठाकुर साहब मुझे पैसों की जरुरत है मुझे कुछ पैसे दे दीजिये और बदले में मेरी बीवी के कुछ जेवरात हैं जिसको मै आपके पास गिरवी  रख रहा हूँ।
इस पर ठाकुर ने बोला  की अरे इसकी कोई जरुरत नहीं है तुम पहले पैसे ले जाओ और अपनी बीवी का इलाज करवाओ। बाकी हम बाद में देख लेंगे।
हालाँकि रामु बहुत ही खुद्दार व्यक्ति था लेकिन इस बार वह समस्याओं से घिर गया था और उसे अपने उसूलों से समझौता करना पड़ा।  खैर जो भी हुआ पैसों की लें देन हो गयी उसकी बीवी अस्पताल से छूट कर घर आयी।
एक दिन वो लोग आपस में बातें केर रहे थे तब उसकी बीवी ने पूछे की ठाकुर साहब इतने कठोर इंसान वो अचानक आपको इतने पैसे उधार कैसे दे दिए।  तब रामु ने बोला की मैंने तुम्हारे जेवर ठाकुर साहब के पास गिरवी रखा है। उसकी बीवी कुछ देर तक सोचने के बाद बोली की कोई बात नहीं हम वो सारे जेवर छुड़ा लेंगे।
कुछ दिन बाद ठाकुर घूमते हुए आये और पैसे के बारे में बोले। रामु ने जवाब दिया की ठाकुर साहब अभी कुछ दिन इंतजार कीजिये मैं आपके पैसे वापस कर दूंगा क्यूंकि अभी घर बनाने का काम शुरू किया हूँ।  ठाकुर ने  तुरंत बोला की अगर पैसे की जरुरत है तो मुझसे ले लो लेकिन  रामु ने मना कर दिया।
एक दिन ऐसे गाँव के चौपाल पर बातें करते हुए ठाकु ने बोला कि रामु  बहुत ही खुद्दार व्यक्ति है लोगों को उस से कुछ सीखना चाहिए।

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