शालीनता

 रवि का परिवार बहुत ही संपन्न परिवार था। उसके पापा डाक विभाग मे ऊँचे पद पर कार्यरत थे। रवि भी इंजीनियरिंग की पढाई एक नामी गिरामी कॉलेज से किया था और हाल ही में किसी निर्माण कंपनी में नौकरी ज्वाइन किया था। तंख्वाह भी बहुत अच्छी थी। 

रवि दो भाई और एक बहन थे। छोटा भाई पब्लिक सर्विस कमिशन की तैयारी करता था और बहन मेडिकल की। चूंकि रवि के पिता पढ़े लिखे इंसान थे और पढाई का महत्व समझते थे, उन्होंने अपने बच्चों को भी शिक्षित करना जरूरी समझा इस लिये वे एक को इंजीनियरिंग दूसरे को  सर्विस की तैयारी और लड़की को मेडिकल की पढाई करवा रहे थे। पढ़ा लिख इंसान अपने पूरे परिवार को शिक्षित करना चाहता है। रवि अच्छे पोस्ट पर कार्यरत था और  कंपनी के तरफ से बहुत सारी सुविधायें भी मिली थी। चूंकि ये संसारिक नियम है कि लड़का या लड़की जब जवान हो जाए और पढाई पूरी करके नौकरी पकड़ ली तो उनके शादी के लिए रिश्ते भी बहुत जल्द आने लगते हैं। 

रवि के माँ बाप की ये इच्छा थी कि उनको  एक खूबसूरत, दक्ष, शिक्षित, सुशील और शालीन बहू मिले। कहीं से भी रिश्ता आता था तो वे उस लड़की में ये सारे गुण खोजते थे। इस चक्कर में उन्होंने कितनी सारी रिश्तों को ठुकरा दिया। और चूंकि रवि अपने भाई बहनों मे सबसे बड़ा था इस लिए उसकी शादी किये बगैर उसके भाई और बहन की शादी उसके माता पिता करना नही चाहते थे। और धीरे धीरे रवि के भाई और बहन दोनो ने भी अपनी पढाई पूरी कर ली। रवि के भाई को सरकारी नौकरी मिल गयी और उसकी बहन भी मेडिकल की पढाई पूरी करके एक अस्पताल में ट्रेनी के तौर पर ज्वाइन की थी। 

फिर क्या था रवि के माँ बाप को अपनी बेटी की शादी की भी चिंता थी उन्हें उसके लिए एक अच्छा सा लड़का देख कर उसके हाथ पीले करने थे। इस लिये वो लोग चाहते थे कि रवि की शादी जल्दी हो जाए और फिर बेटी की शादी के लिए सोचा जाए। 

काफी दिनों बाद एक रिश्ता आया। लड़की पढ़ी लिखी थी और उसके पास नौकरी भी थी जिसमे उसको अच्छी खासी सैलरी भी थी। 

रवि के माता पिता लड़की को देखने के लिए गए। जो रीति रिवाज के तहत काम होता है वैसे ही हुआ। लड़की भी काफी सुंदर थी और उसकी सरलता और सहजता का कोई मिशाल ही नहीं। 

सर पर दुपट्टा झुकी हुई नज़रें और दो चार बार के सवाल में एक बार जवाब देना उसकी शालीनता में चार चाँद लगा रहा था। रवि की माँ लड़की को एकटक देखती जा रही थी। 

रवि की माँ को ऐसा लग रहा था जैसे की वो आज ही उस लड़की को अपनी बहु बना कर अपने घर ले जाए। लेकिन शादी विवाह की एक रीति रिवाज होती है जिसको पुरा करना होता है और तब उसके बाद ही शादी होती है। 

लड़की देखने की सारी औपचारिकता पूरी की गयी । कहा गया है कि बह भी बेटी के समान होती है। रवि की माँ लड़की को देख दंग रह गई। 

घर वापस आते समय रवि की माँ बार बार उस लड़की के बारे में बोले आज रही थी। 

घर पहुँच कर रवि और उसका परिवार ये सोच रहा था कि क्यों न जल्दी ही शादी करके लड़की को घर लाया जाए। क्योंकि उस लड़की की शालीनता से सब मंत्रमुग्ध हो गए थे। 





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