शहर की चकाचौंध बनाम गाँव की मिट्टी की खुशबू

 शहर की चकाचौंध में इंसान कहीं गाँव की मिट्टी की खुशबू को भूलता तो नहीं  जा रहा है ?

अगर सच कहूं तो हर किसी का कही न कही गाँव से कोई न कोई रिश्ता  है। किसी का जन्म गाँव में हुआ तो कोई गाँव में पला बढ़ा।  गाँव में ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो पूर्णतः प्राकृतिक हैं।  पुराने जमाने में गावों में गुरु (शिक्षक) पीपल के पेड़ के नीचे सैकड़ों बच्चों को पढ़ाते थे।  फीस रूप में उनको गुरु दक्षिणा दी जाती थी जो अपने आप में एक बहुत ही सम्मान के रूप में  जाना जाता था।  चाहे वो आजादी से पहले की बात हो या आजादी के बाद।  गावों में शिक्षा ग्रहण करने की प्रथा अपने आप में अद्वितीय रही है।  वैसे अगर कहें तो अंग्रेजों ने हमारे देश को एक दम से खोखला करके हमें सौंपा था।  हम सब के पास कुछ भी नहीं था।  वो तो उस समय के सरकार और जनप्रतिनिधियों ने अपना दमखम  दिखाया और समय समय पर जरुरी कदम उठाये जिस से देश को धीरे धीरे अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर मिला और हमारा देश धीरे धीरे आगे बढ़ता चला गया।  बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। शहरों में तो कुछ न कुछ सुविधएं थीं लेकिन गावों में ये सब सुविधाएं नदारद थीं।  फिर भी जिंदगी की रफ्तार कभी रुकी नहीं और आगे चलती गयी।  

गांव की धूल मिट्टी में इतनी ताकत होती थी की इंसान गंभीर से गंभीर बिमारी से लड़ सकता था। दरअसल, गांव की प्राकृतिक रूप से उगाई गयी फल सब्जियां इंसान को अंदर से मजबूती प्रदान करती थी , जिससे इंसान काफी मजबूत होता था और मेहनत करने के काबिल होता था। खेतों में मेहनत, मजदूरी करने के लायक होता था।  

आज शहरों में लोग अपने आप को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए जिमखाने में घंटो मेहनत करते हैं।  लेकिन  वहीं गावों में लोग मेहनत मजदूरी और खेतों में काम करके अपने आप को फिट और तंदुरुस्त रखते हैं।  गावों में लोगों में काफी मेल मिलाप रहता है लेकिन वही शहरों में लोग एक दूसरे को बहुत कम ही जानते पहचानते हैं।  बगल वाले पड़ोसी का नाम क्या हैं वो क्या करते हैं ये सब जानने के लिए नहीं किसी के पास समय है और नहीं दिलचस्पी है।  

शहर में लोग अपने अपने काम, व्यवसाय में व्यस्त हैं।  किसी को अपनी नौकरी के लिए मीलों दूर जाना पड़ता है तो कोई कुछ ही दूरी पर अपना जीवन यापन करने का जरिया बना रखा है।  बस इसी व्यस्तता में शहर की जिंदगी  चल रही है।  

अगर सुविधाओं की बात करें तो शहर में गांव की तुलना में ज्यादा सुविधाएं हैं।  शहरों में रोजी रोटी की कमाई का जरिया काफी ज्यादा है।  इस लिए लोग कमाने के लिए और अपनी जिंदगी में एक मुकाम हासिल करने के शहरों की तरफ रुख कर रहे हैं।  गावों में इतनी सुविधाएं  नहीं हैं।  लोगों के पास रोजी रोटी का मुख्य साधन खेती और और इससे जुड़े हुए काम हैं।  जो की सबके पास नहीं हैं। मजदुरी ही एक ऐसा साधन है जिससे अधिकांश लोगों की रोज रोटी चलती है। शहर में कल कारखाने हैं, जो लोगों को नौकरी देते हैं जिससे उनका परिवार चलता है। 

शहरों में बिजली पानी की आपूर्ति पूर्ण रूप से होती है और बिना किसी बाधा के होती है। शहर में सुरक्षा के काफी उपाय हैं।

सड़कें काफी विकसित और अच्छी होती हैं। इस लिए हर कोई गाँव से शहर की ओर कूच करना चाह रहा है। 

ऐसा नही है कि गाँव में विकास नही है। गाँव भी विकास के मामले में पीछे नही है। विकास की रफ्तार गाँव में भी काफी ज्यादा है। लेकिन शहर की तुलना में कम है। 


Post a Comment

0 Comments