जीवन में आशावादी कैसे बनें (How To Be An Optimistic in Your Life) !

दोस्तों, आशावाद एक मानसिक नजरिया है किसी चीज को देखने, परखने और समझने का।  आशावाद किसी भी चीज में एक सकारात्मकता को दर्शाता है।  जबकि निराशावाद हर चीज में नकारात्मक चीजें ही दर्शाता है।  
हम एक उदाहरण दे रहे हैं। सोचिये अगर आपको कोई मंजिल पाना है और वो मंजिल काफी दूर है। तो आशावादी व्यक्ति उसमें ये देखेगा की हम कुछ दुर चलेंगे और मेहनत करेंगे तो वो मंजिल हमारी कदमों में होगी  और हम उस मंजिल को पा लेंगे, बस कुछ मेहनत करनी पड़ेगी।  लेकिन वहीँ एक निराशावादी व्यक्ति पहले ही हार मान लेगा और बोलेगा की अरे मंजिल तो बहुत दूर है बहुत चलना पड़ेगा और बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। अगर एक प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाला विद्यार्थी पहले ही मन में ये सोच ले कि अगर परीक्षा को पास करना है उसमें अव्वल आना है तो उसके लिए बहुत मेहनत करना होगा और ये सोच कर पीछे हट  जाता है और पढाई से अपना मुंह मोड़ ले तो समझिये की वो विद्यार्थी निराशावादी है और वो नकारात्मक प्रवृतियों का शिकार  हो चूका है।



क्या है आशावाद (What is optimism)?
आशावाद भविष्य के बारे में या विशेष रूप से किसी चीज की सफलता के बारे में सकारात्मक सोच की एक भावना है। आशावाद विश्वास और अच्छाई का एक सिद्धांत है जो बुराई या नकारात्मक सोच (Negative Thinking) के ऊपर हावी होता है।यह किसी काम को सफलतापूर्वक करना और उससे एक सकारात्मक परिणाम पाने की कामना है। आशावाद सर्वश्रेष्ठ चीजों की अपेक्षा करना और सभी चीजों में सर्वश्रेष्ठ देखने की एक प्रवृति है। यह एक सिद्धांत है जो बुराई पर अच्छाई  की अंतिम विजय का संकल्प रखता है। आशावाद एक दार्शनिक सिद्धांत (Philosophical Doctrine) है जो की  दुनिया में सबसे अच्छा है।

आशावाद और निराशावाद (Optimism and Pessimism)

आशावाद और निराशावाद दोनों इंसान के जीवन के दो  प्रवृतियां है जिसको इंसान का सामना हमेशा होता रहता है। एक तरफ आशावादी इंसान जीवन की हर एक कठिनाइयों और बुराई की श्रृंखला को पार करते हुए जीवन में आगे बढ़ते जाते हैं तो वही दूसरी तरफ निराशावादी इंसान अपनी जीवन की कठिनाईओं और परेशानियों से तंग आकर हालात से समझौता  कर लेता है सिर्फ ये सोच कर की उसके नसीब में नहीं था।
आशावादी  व्यक्ति के लिए कोई भी काम ज्यादा  कठिन नहीं होता जब की निराशावादी व्यक्ति हर काम को तिल का तार और राइ का पहाड़ बना देता है।

मूल (Origins)
आशावाद और निराशावाद दोनों परिवार के पर्यावरण और उसके कारकों से प्रभावित होते हैं। एक इंसान आशावादी या निराशावादी अपने आस पास के पर्यावरण, जिस परिवेश में वो रहता है,जिन लोगों के बीच वो रहता है और उसका असर उस व्यक्ति पर पड़ता है। कुछ कुछ मामलों में ये भी कहा जाता है की आशावाद और निराशावाद आनुवंशिक कारणों से भी हो सकता है।  

अंत में मै  यह कह सकता हूँ कि  आशावाद और निराशावाद दो ऐसी चीजें है जो  इंसान की जिंदगी के दो पहलू  हैं जिनका इंसान की जिंदगी में सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।  लेकिन ये आप सब के ऊपर निर्भर करता है कि  आपको आशावादी बनना है या निराशावादी।
आशावाद आपको जीवन में निरंतर आगे की ओर ले जायेगा और आप जीवन की बुलंदियों को छू पाएंगे , जबकि निराशावाद आपके जीवन के हर मोड़ मिलेगा जो आपको जीवन में कठिनाइयों और पीछे की तरफ ले जायेगा और आप जीवन के मूल मकसदों को पूरा करने से पीछे रह जायेंगे।

शुक्रिया

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1 Comments

  1. जीवन में आशावादी जरूर बनें।

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