हमारी व्यस्तता कहीं हमें अपनों से दूर तो नहीं कर रही है।

दोस्तों ! आज के हमारी दैनिक दिनचर्या में व्यस्त कहीं हम अपनों से दूर तो नहीं हो रहे है। हम सब अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए दिन भर जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। ना हम किसी अपनों को ठीक से समय दे पा रहे हैं और नहीं उनकी सूझ ले रहे हैं।

जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने की होड़  

आज हम सब अपनी जीवन की मूल भूत जरूरतों को पूरा करने के लिए भाग दौड़ में लगे हुए हैं। इन सबके पीछे हमने अपना समय सारणी ऐसे तय कर रखा है कि किसी से मिलने और बात करने के लिए भी सोचना पड़ रहा है।
सोमवार से शनिवार हम सब अपने अपने कारोबार, नौकरी के पीछे भागते हैं। हफ्ता में एक दिन सिर्फ रविवार को हम सब अपने बाल बच्चों को समय देते हैं और उनको सैर पर कहीं ले जाते है। किसी रेस्तरां में ले जाते हैं और रात का खाना सपरिवार खाते हैं।
अब मैंने एक आदमी के पूरे हफ्ते की कार्य शैली बता दिया है। इसमें दूसरों के लिए समय की कोई जिक्र नहीं है।

जब हम अपने किसी करीबी, किसी जानने वाले या किसी रिश्तेदार को समय नहीं देंगे तो हमारे रिश्तों में दूरी आयेंगी ही। कहा जाता है कि रिश्तेदारी निभाने से ही ज्यादा समय तक रहती है।

आजीविका के लिए गांव से दूर दूसरे राज्यों में पलायन
आज कल लोग अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। परिवार रिश्तेदार पास पड़ोसी सब गांव में ही छूट जाते हैं। हम साल में एक या दो बार गांव जाते हैं वो भी किसी शादी समारोह,या पर्व त्योहार के अवसर पर। तब हमें सबसे मिलने जुलने का मौका मिलता है।

अब हम उपरोक्त बातों को समय की मांग कहें या हमारी मजबूरी, या जरूरी कहें । अलग अलग लोगों के लिए इसका अलग अलग मतलब और निष्कर्ष है।
ऐसा कहा जाता है कि आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में अपने आप को स्थित रखने के लिए उसी रफ्तार से भागना पड़ेगा नहीं तो कोई कुचल कर आगे निकल जाएगा।
तो हम ये कह सकते हैं कि शायद समय की यहीं मांग है लेकिन अब हमें ये तय करना है कि हमें ये सब कैसे ठीक करना है।

उपरोक्त सभी बातों के लेखक
माबिया हुसैन ऐसे सोचते हैं।

धन्यवाद ।

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2 Comments

  1. सोचना ही है तो, जीवन की दूरियों पर शोध करो जिसे अपनों से दूरी बता रहे हो... और भागदौड़ भरी परिवर्तन फ़ास्ट क्यों है...?
    But U Try Good...

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    1. सुझाव के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।

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